सिस्टम की मार, बैंकिंग लाचार : उज्जैन RBO के एक फैसले से तराना सहित पूरे अंचल में ‘वित्तीय आपातकाल’ जैसे हालात

centralvoicenews

23/03/2026

सिस्टम की मार, बैंकिंग लाचार: उज्जैन RBO के एक फैसले से तराना सहित पूरे अंचल में ‘वित्तीय आपातकाल’ जैसे हालात

बड़ा झटका: जनधन खातों की Re-KYC के फेर में बैंक मित्रों की आईडी बंद, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप

अर्पित बोड़ाना तराना | डिजिटल इंडिया और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुँचाने के दावों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सोमवार दोपहर 1 बजे से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के उज्जैन क्षेत्रीय व्यवसाय कार्यालय (RBO) के अंतर्गत आने वाले अधिकांश बैंक कॉरेस्पोंडेंट (BC) की आईडी अचानक बंद कर दी गई। इस तकनीकी तालाबंदी का सीधा असर तराना ब्लॉक सहित आसपास के दर्जनों गांवों की बैंकिंग व्यवस्था पर पड़ा है। आलम यह है कि अब तक हजारों उपभोक्ता पैसे निकालने और जमा करने के लिए भटक रहे हैं।बैंक के इस कड़े रुख ने ‘करें कोई और भरे कोई’ वाली कहावत को सच कर दिया है। दरअसल, बैंक प्रशासन प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए उन खातों को सक्रिय (Active) करना चाहता है जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। इन खातों की Re-KYC करना अनिवार्य है। लेकिन, बैंक ने लक्ष्य पूरा करने के लिए बीसी संचालकों की आईडी ही ब्लॉक कर दी। बीसी संचालकों का कहना है कि जिन खातों की वजह से सजा दी जा रही है, उनमें से कई खाताधारक क्षेत्र छोड़कर जा चुके हैं या मृत हो चुके हैं, ऐसे में आईडी बंद कर उन पर दबाव बनाना अनुचित है।आईडी बंद होने से न केवल ग्रामीणों की सेवाएं रुकी हैं, बल्कि बीसी संचालकों के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

तराना क्षेत्र के एक बीसी संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमें शनिवार दोपहर 3 बजे से बिना किसी लिखित नोटिस के अचानक सिस्टम से बाहर कर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में हम बैंक का चेहरा होते हैं। अब लोग हमसे विवाद कर रहे हैं कि हमारे पैसे क्यों नहीं निकल रहे। यह हमारे आत्म-सम्मान और आजीविका दोनों पर हमला है।”सोमवार को सप्ताह का पहला दिन होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुजुर्ग अपनी पेंशन लेने और मजदूर अपनी मजदूरी निकालने बीसी केंद्र पहुँचे, लेकिन वहां ‘सर्वर डाउन’ या ‘आईडी बंद’ की सूचना पाकर उन्हें मायूस लौटना पड़ा। तराना के पास स्थित गांवों के लोगों को अब छोटे-छोटे कामों के लिए 15-20 किलोमीटर दूर शहर की मुख्य शाखा जाना पड़ रहा है, जहाँ पहले से ही लंबी कतारें लगी हैं।

आईडी बंद होने से धरातल पर स्थितियां अत्यंत विकट हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चक्र पूरी तरह थम गया है। सबसे बुरा असर उन बुजुर्गों और मजदूरों पर पड़ रहा है जो पेंशन और अपनी मेहनत की मजदूरी की निकासी के लिए पूरी तरह बीसी केंद्रों पर निर्भर हैं। बैंकिंग सेवाएं ठप होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह रुक गया है, जिसका सीधा असर स्थानीय व्यापार और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां बीसी संचालक अपनी दैनिक आय खोकर आर्थिक मार झेल रहे हैं और नाराज ग्राहकों के आक्रोश का सामना करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर बीसी केंद्रों पर ताले लटके होने के कारण मुख्य बैंक शाखाओं पर अचानक भीड़ का दबाव कई गुना बढ़ गया है, जिससे वहां भी व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?
​इस मामले में जब उज्जैन RBO के संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह एक “टारगेट बेस्ड” कार्रवाई है। जैसे-जैसे खातों की केवाईसी अपडेट होगी, आईडी धीरे-धीरे बहाल की जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि तब तक उन हजारों उपभोक्ताओं का क्या होगा जो आज दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं?

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